Monday, July 30, 2012

ये बारिशें भी ..!



संग दर्द कितने लायीं हैं..!
ये बारिशें भी ..!
कितने रोती हैं ......
ये बारिशें भी ..!

बूंद- बूंद छू लो कभी,
कभी बहने दो दिन- रात,
आज उदास,
तो कल नाराज़..
ये बारिशें भी ..!

बन गयी यादों की परछाई  सी,
मेरे साथ अकेली है पुरवाई   भी।
हाथ पकड़कर ले जाती कहीं,
 ये बारिशें भी ..!

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