संग दर्द कितने लायीं हैं..!
ये बारिशें भी ..!
कितने रोती हैं ......
ये बारिशें भी ..!
बूंद- बूंद छू लो कभी,
कभी बहने दो दिन- रात,
आज उदास,
तो कल नाराज़..
ये बारिशें भी ..!
बन गयी यादों की परछाई सी,
मेरे साथ अकेली है पुरवाई भी।
हाथ पकड़कर ले जाती कहीं,
ये बारिशें भी ..!
