दिल की तमन्ना थी, जीवन की राहों मे
ऐसा मिले मुझको साथी ।
साथ वो जब जब हो, ना कोई भी गम हो
वो हो दिया,और मैं बाती ।
जब भी तू रूठेगा, आँखों से आंसू का
सागर एक छूटेगा जैसे,
सदियों पुराना है नाता हमारा ये
क्षणभर में टूटेगा कैसे?
तूने तो बोला था, गले लगा लेगा
गर मुझको एक आंसू भी आया
झूठा वादा तेरा, होगा क्या अब मेरा ..
तुने ही मुझको रुलाया
सदियों पुराना है नाता हमारा ये
क्षणभर में तुने भुलाया...,
क्षणभर में तुने भुलाया..
Very nice poem
ReplyDeleteThanks..!! :-)
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDelete